वर्चुअल सियासी संग्राम: लाखों व्हाट्सएप ग्रुप, डिजिटल माध्यम से चल रही है चुनावी तैयारियां
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राजनीतिक दल वर्चुअल चुनाव विचार करने को मजबूर है 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब देश के प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने पूरे देश में अलग-अलग राज्यों समेत जिलों में डिजिटल वार रूम गठन करना शुरू किया था तो उनको इस बात का अंदाजा नहीं था कि 2022 के विधानसभा चुनाव की शुरुआत उस वक्त तैयार किए जाने वाले आईटी सेल के वार्ड रूम से लड़े जाएंगे।
लेकिन अब समय ऐसा आ गया है कि सभी पार्टियां को मजबूर होना पड़ रहा डिजिटली संवाद करने के लिए है जानकारों के मुताबिक़ 2019 में तैयारियों की होंगी उन्हें इस चुनाव जड़ फायदा होगा।
सोशल मीडिया के जानकारों की माने तो जिन लोगों ने 2019 में सबसे ज्यादा तैयारियां की होंगी उन्हें यह सबसे ज्यादा इसका फायदा मिलने वाला है। हालांकि सभी राजनीतिक दलों का अपना-अपना दावा है कि वह पूरी तरीके से डिस्टर्ब और रोम के माध्यम से चुनाव लड़ने को तैयार है।
पूरे देश में डिजिटल माध्यम से बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने अपने डिस्टल वॉरियर्स तैयार किए हैं दोनों पार्टियों के पास ना सिर्फ आई थी एक्सपोर्ट है बल्कि अपनी बड़ी-बड़ी टीमें भी लगातार पिछले कई सालों से चुनावी मैदान में लगाई हुई थी।
भारतीय जनता पार्टी के यूपी डिजिटल टीम को लीड कर रहे कामेश्वर नाथ मिश्रा बताते हैं कि उनकी टीम डेटाबेस में बहुत मजबूत है। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक बूथ समिति का उनके पास जाता है वह कहते हैं कि आप से नहीं बल्कि पिछले 3 सालों से लगातार काम करने के बाद याद आता बेस बनाया गया है ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए डिजिटल माध्यम से पकड़ बनाने के लिए उनके प्रत्येक भूत के कम से कम 5 सदस्य के पास स्मार्टफोन है जो पार्टी की गतिविधियों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में कारगर साबित हो रहे हैं।
अब बात करते हैं समाजवादी पार्टी की तो राज्य में डिजिटल वॉर्डरूम केवल भाजपा के पास नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी ने भी तैयार किया हुआ है। हर विधानसभा तक बिस्तर माध्यम से जुड़ाव और जनता तक पहुंचा रही है समाजवादी पार्टी की सोशल मीडिया विंग से जुड़े एक कार्यकर्ता ने बताया कि पार्टी ने विधानसभा वार रूम के लिए एक डिजिटलबिन तैयार किया है।
कांग्रेस की सोशल मीडिया विंग राष्ट्रीय स्तर पर और प्रदेश के स्तर पर लगातार अपनी मजबूती बना रही है उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की मीडिया विंग से जुड़े एक कार्यकर्ता ने बताया कि उनके पास उत्तर प्रदेश की एक बड़ी आबादी व्हाट्सएप के माध्यम से जुड़ी है।
बहुजन समाज पार्टी का कहना है कि वर्चुअल माध्यम से चुनाव प्रचार के लिए सबसे पीछे बहुजन समाज पार्टी को ही कहा जा रहा है कि बसपा के नेता इस बात को मानने से इनकार करते हैं।
हालांकि करोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने फिलहाल रैली जनसभा पर रोक लगा दी है। और सभी पार्टियों के पास एकमात्र विकल्प है डिजिटल संवाद का। हालांकि 15 जनवरी के बाद इस पूरे मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग एक बार फिर से समीक्षा करेगा उसके बाद यह साफ होगा कि पूरे चुनाव भर डिजिटल संवाद करना पड़ेगा या फिर रैली जनसभा करने को इजाजत मिलेगी।
