September 12, 2026

पूर्वांचल की बात

दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर विश्लेषण

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे क्या बताते है ?

दिल्ली विधानसभा के नतीजे यह बताते हैं कि अगर आप जनता से सरोकार नहीं रखोगे, जनता से विचार विमर्श नहीं करोगे, उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करोगे, कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं करोगे तो चुनाव के समय न तो जनता आपको समर्थन करती है और न कार्यकर्ता आप के लिए जमीन पर प्रचार करता है। चुनाव के दौरान से ज्यादा चुनाव के बाद जनता से रूबरू होना अत्यंत जरुरी होता है.

दिल्ली के दिल में क्या है?

दिल्ली के दिल में क्या है यह जानने के लिए आप को कोई नासा या इसरो से वैज्ञानिकों को बुलाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली का दिल कोई एक विशेष समुदाय या सोच से नहीं बना है। दिल्ली का दिल एक बहुआयामी सोच वाला है जो अपने आप में बहुत खास है क्योंकि दिल्ली एक छोटा भारत है जिसमे हर वर्ग, जाति, भाषा, धर्म के लोग बसते हैं। दिल्ली में जो सबको लेकर चलेगा वह दिल्ली के दिल का विजेता होगा। लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि देश विरोधी ताकतों के प्रति नरमी या उदारता दिखाई जाए।

दिल्ली को किस चीज की है जरूरत?

दिल्ली को सबसे पहले सुरक्षा की जरूरत है। दूसरे स्थान पर दिल्ली को अच्छी और सस्ती शिक्षा और तीसरे स्थान पर रोजगार। इसी के साथ दिल्ली को मूलभूत सुविधाओं- बिजली, शुद्ध पीने का पानी, अच्छी सड़कें, झुग्गी वासियों को मकान, यातायात सुविधाओं, से लैस करना की सख्त जरूरत है। दिल्ली में वायु प्रदूषण और पार्किंग की एक बहुत बड़ी समस्या है जिस पर केंद्र और राज्य की सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं किया तो दिल्ली कभी वर्ल्ड क्लास सिटी नहीं बन पायेगी।

देश की राजधानी दिल्ली को और बेहतर बनाने और हर तरह की व्यवस्थाओं, सुविधाओं को विकसित करने के लिए क्या करना होगा?

दिल्ली को और बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले दिल्ली में अंतराष्ट्रीय स्तर की विश्वविद्यालयों, स्किल डेवलपमेंट केंद्र और वैज्ञानिक शोध संस्थाओं को बढ़ावा देना होगा जो बेहतरी के लिए मॉडर्न उपायों का मार्गदर्शन करने के साथ साथ देश के गांव गरीब की ज़िंदगी को भी बेहतर बनाने में सहायक होंगे। दिल्ली वासियों को एक बेहतर स्वास्थ्य देने के लिए प्रदूषण को कम करने के उपायों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की जरूरत है। फ्री सुविधाओं से ज्यादा बेहतर सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

दिल्ली का युवा क्या सोचता है?

दिल्ली का युवा वर्ग खासकर गरीब और मिडिल क्लास सबसे ज्यादा अपनी शिक्षा और रोजगार को लेकर चिंतित रहता है। उसे बेहतर शिक्षा के साथ साथ रोजगार के अवसरों की खासा जरूरत है। वह अंतराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग और बेहतर कम्युनिकेशन के गुण ग्रहण करना चाहता है जिसकी मदद से राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग ले सके और नौकरी के बेहतर अवसर पा सके। बड़ी संख्या में ऐसे भी युवा हैं जो 12वीं पास करने के बाद रेगुलर कॉलेज जाना चाहते लेकिन एडमिशन के लिए हाई अंकों की मांग के चलते 70 प्रतिशत से कम अंक लाने वाला युवा कॉलेज से बाहर रह जाता है. सही उच्च शिक्षा और ट्रेनिंग के आभाव में युवा उस मक़ाम तक नहीं पहुँच पाता जहां पर उसे होना चाहिए. रोजगार की प्रतियोगिता में भी अच्छा नहीं कर पाने के चलते या तो बेरोजगार रहता है या जो काम मिले उसे करने के लिए मजबूर हो जाता है. इसी के चलते कई युवा गलत राह भी अपना लेते हैं. दिल्ली की सरकार को ऐसे युवाओं को भी रेगुलर कॉलेज जाने की व्यवस्था करनी चाहिए. अगर नई कॉलेजों का निर्माण नहीं कर सकते हैं तो वे स्कूल जो सिर्फ दोपहर तक ही चलते हैं उन्हें इवनिंग कोलेजों में परिवर्तित कर देना चाहिए.

दिल्ली की महिलाएं क्या चाहती हैं?

दिल्ली की महिलाएं देश की अन्य भागों की महिलाओं से थोड़ी भिन्न होती है। दिल्ली की महिलाएं अपने पुरुष साथी के कदम से कदम मिलाकर चलना चाहती हैं। परिवार की देखरेख हो या आर्थिक रूप से परिवार का सहयोग करना यहां की महिलाएं खूब अपना कर्तव्य निभाती हैं लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के चलते दिल्ली की महिलाएं काफी परेशानियों का सामना करती हैं. पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने के वजह से कई पढ़ी लिखी महिलाएं भी घर पर ही रहने को मजबूर है जिसके चलते उनकी पढाई लिखाई और योग्यता का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है. दिल्ली में ऐसी भी कई सारी महिलाएं हैं जो हाई स्कूल, ग्रेजुएशन तक शिक्षित हैं लेकिन कुशल रूप से प्रशिक्षित न होने के चलते नौकरी नहीं कर पाती हैं. महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, बेहतर स्किल ट्रेनिंग और रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार को मिलकर काम करने की जरुरत है.

दिल्ली को भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए हर संभव प्रयास की जरुरत

दिल्ली में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का आज वजूद है तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अन्ना हजारे की अगुवाई में भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन है. इस आन्दोलन में कई लोग शामिल थे जिनमे किरण बेदी, अरविन्द केजरीवाल, योगेन्द्र यादव, शांति भूषन जैसे लोग प्रमुख चहरे थे. आज इनमें से लगभग सभी ने अलग रास्ता अपना लिया है. किसी ने अलग हो कर नई पार्टी बना ली तो कोई अन्य पार्टी में शामिल हो गया और कुछ लोग राजनीति से अलग ही हो गए. भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन को हथियार बनाकर दिल्ली की सत्ता में आई आम आदमी पार्टी को दिल्ली जन लोकपाल को तुरंत नियुक्त करने की आवश्यकता है ताकि दिल्ली में व्याप्त भ्रष्टाचार मिट सके जिससे एक स्वच्छ प्रशासन स्थापित हो सके.

शिक्षा में सुधार के कई अहम कदम उठाने होंगे

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा मुफ्त तो है लेकिन गुणवता के मामले में बहुत पीछे है. दूसरी ओर निजी शिक्षा संस्थानों में एक हद तक अच्छी शिक्षा मिलती है लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के पहुँच से काफी दूर है. दिल्ली सरकार को राज्य में ऐसी स्कूलों का निर्माण करना होगा जहां अच्छी और सस्ती शिक्षा मिले. हर साल सर्वे में पाया जाता है की छात्र छात्राओं की पढने, लिखने और समझने की क्षमता काफी कमजोर है. सुर्वे में पाया जाता है की 5वीं कक्षा का छात्र दूसरी कक्षा की किताब पढ़ नहीं पाता है, 8वीं कक्षा का छात्र 5वीं कक्षा के गणित के सवालों का हल नहीं कर पाता है. सरकार को शिक्षा के गुणवता पर खासा ध्यान देना होगा जिस के लिए अध्यापकों की निरंतर ट्रेनिंग, मॉडर्न शिक्षा प्रणाली को अपनाना, छात्र-छात्राओं के माता-पिता से लगातार संपर्क में रहना और एक स्वस्थ एवं शांत वातावरण का निर्माण करना होगा.

बच्चों एवं महिलाओं की स्वास्थ्य की चिंता की जरुरत

एक RTI रिपोर्ट के अनुसार, 2013 से 2019 के बीच दिल्ली में कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या 244 है जो एक शर्म की बात है. दिल्ली जहां की सरकार स्वयं अपने आपको देश की सबसे बेहतर और मुनाफे में चलने वाली सरकार बताती है. जहां पर बिजली, पानी और महिलाओं को बस सेवाएं मुफ्त में देने का दावा करती है वहां पर बच्चों की भूख से मृत्यु होना बहुत ही दुःख की बात है. दिल्ली में कुपोषण से मृत्यु का सबसे बड़ा कारण संतुलित आहार नहीं होना, गरीबी, निरक्षरता और अज्ञानता, स्वच्छता की कमी, छोटी उम्र में शादी होना जैसी बाते हैं. विकास और स्वच्छ राजनीति के नाम पर तीसरी बार सत्ता में आने वाली आम आदमी पार्टी को इस पर खासा ध्यान देने की जरुरत है. दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की स्थिति काफी दयनीय है. दिल्ली में अस्पतालों की कमी तो है ही साथ ही मौजूदा अस्पतालों में बिस्तरों की भी काफी कमी है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 30% डॉक्टरों की कमी है. जनसंख्या के हिसाब दिल्ली में कुल डॉक्टरों की संख्या 4,644 होनी चाहिए लेकिन हैं सिर्फ 3,700 डॉक्टर हैं. लगभग 1400 डॉक्टरों की कमी है. दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की सख्त जरुरत है क्योंकि दिल्ली के साथ साथ पडोसी राज्य यूपी, हरियाणा और बिहार से भी भारी मात्रा में मरीज़ इलाज कराने यहां आते हैं.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करने की जरूरत

दिल्ली में फ्री ट्रांसपोर्ट सर्विस से ज्यादा बेहतर और बारंबार पब्लिक ट्रांसपोर्ट की आवशयकता है. जनसंख्या के हिसाब से दिल्ली को लगभग 11,000 पब्लिक बसों की जरुरत है लेकिन सड़कों पर सिर्फ 5,500 बसें ही दौड़ती हैं. पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के चलते निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिससे वायु प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या बहुत ही भयानक शक्ल ले चुकी है जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त टिपण्णी कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट दिल्ली को गैस का चैम्बर तक करार दे चुका है. राज्य की सरकार को इस पर जल्द से जल्द कदम उठाना चाहिए ताकि दिल्ली एक हद तक प्रदूषण से मुक्ति पाए.

दिल्ली की सुरक्षा पर दें खासा ध्यान

दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है. चोरी-चकारी, धोखाधड़ी, हत्या जैसे मामले पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार को अपने राजनीतिक मनमुटाव को छोड़कर केंद्र सरकार के साथ मिलकर राज्य को एक सुरक्षित वातावरण देने की जरुरत है.
शुद्ध पीने का पानी
कुछ हज़ार लीटर मुफ्त पानी तो दिल्ली के कुछ वासियों को मिल रहा होगा लेकिन शुद्ध नहीं. ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली का पानी देश के अन्य नगरों के मुकाबले सबसे गंदा है. BIS द्वारा दिल्ली के 11 स्थानों से सैंपल कलेक्ट किये गए और 11 सैंपलों में एक भी सैंपल 19 गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया. बिना शुद्ध पानी के पानी से पनपने वाली बीमारियाँ लगातार बढ़ रही हैं. मुफ्त गंदे पानी से जितना पैसा लोगों का बचता है उससे कई गुणा ज्यादा बीमार होने पर खर्च हो जाता है. भलस्वा डेरी, संगम विहार, बदरपुर, गोविन्दपुरी, देवली गाँव, और नेब सराय जैसे दिल्ली में कई क्षेत्र हैं जहां पर आज भी लोग पानी के लिए सुबह उठकर लंबी लाइन लगाकर पानी के टैंकर का इंतजार करते हैं. दिल्ली में ऐसे भी कई सारे क्षेत्र हैं जहां पर पानी सिर्फ सुबह एक घंटा और शाम को एक घंटे के लिए ही आता है. दिल्ली सरकार को इन सब मसलों पर ध्यान देने की सख्त जरुरत है. मुफ्त पानी का ढिंढोरा पीटने के बजाए दिल्ली की जनता को साफ़ और शुद्ध पानी मुहैया कराने पर जोर देना होगा.
पक्का करने से पहले कच्ची कॉलोनियों को रिप्लानिंग करने की जरूरत
केंद्र और राज्य सरकार को कच्ची और जेजे कॉलोनियों को पक्का करने से पूर्व उन कॉलोनियों की बसावट स्थिति का जायजा लेने की आवश्यकता है. दिल्ली की कई कॉलोनियां बहुत ही अनियोजित तरीके से बनी हुई हैं. अगर इन कॉलोनियों को ऐसे ही पास कर बसाया जाता है तो दिल्ली को स्मार्ट सिटी बनाने का प्लान सपना बनकर ही रह जायेगा. दिल्ली के इन कॉलोनियों को बिना रीप्लानिंग के बसाया जाता है तो मूलभूत सुविधाएं जैसे पानी की लाइन, सीवर लाइन और गैस की पाइप लाइन बिछाने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. किसी आपदा की स्थिति में भी लोगों की जान-माल बचाने में बहुत दिक्कतें आएँगी.

दिल्ली में अवैध शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री पर लगनी चाहिए रोक.

दिल्ली के कई इलाकों में अवैध शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री बिना किसी रोक-ठोक के चल रही है. कई रिहायशी और झुग्गी बस्तियों में शराब और नशीले पदार्थों का धंधा पुलिस के मिलीभगत के साथ चल रहा है जिसके चपेट में स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चे भी आ रहे हैं. जिन इलाकों में यह धंधे चलते हैं वहां का माहौल तो बहुत ख़राब रहता ही है और उसके आस-पास के इलाकों पर भी इसका प्रभाव रहता है. दिल्ली सरकार को केंद्र सरकार के साथ मिलकर इन धंधों को उखाड़ फेंकने की जरुरत है.

(डिस्क्लेमरः लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं.)

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