कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकने का मामला पहुचा सुप्रीम कोर्ट
1 min read
सेना के रिटायर्ड अफसर ने अदालत का दरवाजा खटखटायाकोरोना वायरस संकट में महंगाई भत्ता रोकना ठीक नहीं
केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सेना के एक रिटायर्ड अफसर ने इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है. दायर याचिका में महंगाई भत्ता कटौती के फैसले को वापस लेने के लिए कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है.
रिटायर्ड मेजर ओंकार सिंह गुलेरिया ने यह याचिका दायर की है. कैंसर पीड़ित ओंकार सिंह गुलेरिया ने शीर्ष कोर्ट के समक्ष कहा है कि बीमार पत्नी के साथ किराये के घर में रहता हूं और मेरी आय का एक मात्र स्रोत मासिक सैन्य पेंशन है. ऐसे लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं जो पेंशन पर निर्भर हैं, लेकिन महंगाई भत्ता रोके जाने के केंद्र सरकार के फैसले से परेशान हैं.
याचिकाकर्ता का कहना है कि जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है, खासकर बुजुर्गों के लिए तो ऐसे समय में महंगाई भत्ते में कटौती का फैसला उचित नहीं है. हम जैसे पेंशनभोगियों के लिए पेंशन ही एक मात्र सहारा है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री के उस बात का पालन करने का निर्देश दे, जिसमें उन्होंने कहा था कि, “वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करें और वेतन में कटौती न करें, दूसरों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोविड-19 अधिक खतरनाक है.”
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकने के लिए राहुल गांधी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की है. मनमोहन सिंह ने कहा है कि मौजूदा वक्त में सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक रूप से मुश्किल में डालना गैरजरूरी है. इससे पहले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी सरकार के इस फैसले को अमानवीय और असंवेदनशील कहा था.
केंद्र सरकार ने गुरुवार को 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों को दिए जाने वाला महंगाई भत्ता रोकने का फैसला किया था. सरकार के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से सरकार पर पड़े आर्थिक बोझ के कारण ये फैसला लिया गया है. केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर ये रोक जून 2021 तक लागू रहेगी. इस कटौती की वजह से केंद्र और राज्य सरकार के खजाने को लगभग सवा लाख करोड़ रुपये की बचत होगी.
